कविता/शायरी/नज़्म लिखना खुद को याद दिलाना है कि सबसे पहले और आखिर में तुम मनुष्य हो जो तुम सांझा करते हो वह दूसरों तक जाता है और उसी से हमें खुद सीखने को मिलता है।
इसलिए लिखना चाहिए और जहां लिख ना सको वहां बोलना चाहिए।
एक विधवा बहू ने अपनी सास को बताया कि वह तीन माह के गर्भ से है परिवार में हंगामा मच गया समाज में भूचाल आ गया लोगों ने पंचायत जुटाई और उस बहू...
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